Thursday, September 10, 2009
धर्म का महत्व और उसके पैमाने
किसी विचारक ने धर्म को अफीम की संज्ञा दी थी । मुझे लगा कि यह म़जे की चीज है, जो उसका उपयोग करता है वो ही उसके मजे को जानता है । लेकिन बात तो उसके बाद की है । दूसरो को मजे कराना भी बहुत मजे का काम है । जो शायद उससे भी मजे का काम है जो उसके उपयोग करने मे आता है । मजे करने वाला । क्य कहे ??? चलो पंडित, मौलवी या फादर कह देते हैं । वैसे हमारे देश में इनके बहुत से और भी नाम है । इन मजे कराने वालो के कपडो से इनका झट से पता चल जाता है । मजे कराना भी कोई आसान काम है भ्ई खास कपडे पहनने पडते हैं, खार किताबे पास रखनी होती हैं (चा हे पढे याना पढे), खास भाषा बोलनी पडती हैं । लोगो के सामने खास तरह से रहन पडता हैं (चाहे बाद मैं कैसे भी रहें पता नही इनको माफ कैसे हो जाता है ?) । खैर मजे जो कराने है ।
Friday, December 19, 2008
ए. आर. अंतुले के ब्यान के सवाल और उनके मायने
केन्द्रीय मंत्री ए. आर. अंतुले के ब्यान के सवाल और उनके क्या है और उन्के अर्थ क्या है ऐर वे किस तरफ् इशारा कर रहे हैं
Saturday, October 4, 2008
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